आचार्य शिरोमणि और गणिनी आर्यिका के अवतरण दिवस पर 48 दीपों से की आराधना

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बड़वानी(निप्र) दिगंबर जैन समाज के प्रमुख संत आचार्य शिरोमणि विद्या सागर जी महा मुनिराज, नवाचार्य श्री  समय सागर जी महाराज और सर्वोच्च गणिनी आर्यिका ज्ञानमति जी माताजी के मंगल अवतरण दिवस शरद पूर्णिमा पर दिगंबर जैन समाज बड़वानी द्वारा बड़वानी ने विराजित आर्यिका विकुंदन श्री माता जी  और संघ के आशीर्वाद से 48 दीपों से भक्तामर आराधना की और पूज्य माताजी और आचार्य श्री समय सागर जी के उत्तम स्वास्थ्य उत्तम रत्नत्रय ,दीर्घायु जीवन की कामना की समाज जन द्वारा दो घंटे का भक्तामर का पाठ स्थानीय सरलम वाटिका में रखा गया था , यहां ये उल्लेखनीय है कि आचार्य श्री विद्या सागर जी और आचार्य श्री का जन्म सदलगा कर्नाटक में हुआ था और सर्वोच्च गणिनी आर्यिका ज्ञानमती जी माताजी का जन्म उत्तर प्रदेश के टिकैत नगर में हुआ था और ये तीनों रत्नत्रय के धारी बाल ब्रह्मचारी है और जैन धर्म को कई तीर्थों का निर्माण कर तीर्थों का जीर्णोद्धार कराया साथ ही कई चेतन कृतियों को भी दीक्षा ,शिक्षा देकर त्याग के मार्ग पर लगाया और साथ ही कई शास्त्र भी लिखे गए जिनका अध्ययन स्वाध्याय कर के श्रावक श्राविकाओं द्वारा अपने जीवन का उद्धार किया जा रहा है, आचार्य भगवन्तों और आर्यिका माता जी की समाज पर और जीवो पर कई उपकार किए गए है जिसको की शब्दों में पिरोया नहीं जा सकता ।
उपरोक्त कार्यक्रम में जैन समाज के महिला,पुरुष,बच्चे,युवा उपस्थित रहे और समाज के अध्यक्ष जिनेन्द्र दोषी महिला मंडल अध्यक्ष सरला जैन ने के द्वारा उपरोक्त जानकारी प्राप्त हुई ।